स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 12th Class science - full story

 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 12th Class science - full story

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 12th Class science - full story

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (class 12 Physics)

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (Electrostatic Potential and Capacitance)

भूमिका

कक्षा 12 भौतिकी का यह अध्याय स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता विद्युतस्थैतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इस अध्याय में हम यह समझते हैं कि विद्युत आवेशों के कारण किसी बिंदु पर कितना कार्य करना पड़ता है, उसी को वैद्युत विभव कहते हैं। साथ ही, किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को धारिता कहा जाता है। यह अध्याय न केवल बोर्ड परीक्षा बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE, NEET) के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

वैद्युत विभव (Electrostatic Potential)

किसी विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य, उस बिंदु का वैद्युत विभव कहलाता है।

सूत्र:
V=WqV = \frac{W}{q}

जहाँ,
V = वैद्युत विभव
W = किया गया कार्य
q = परीक्षण आवेश

SI मात्रक: वोल्ट (Volt)

बिंदु आवेश के कारण वैद्युत विभव

यदि किसी बिंदु आवेश Q से r दूरी पर स्थित बिंदु का वैद्युत विभव ज्ञात करना हो, तो:

V=14πε0QrV = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r}

यह विभव दूरी के साथ घटता जाता है और आवेश के चिन्ह पर निर्भर करता है।

यह विभव दूरी के साथ घटता जाता है और आवेश के चिन्ह पर निर्भर करता है।

वैद्युत विभवांतर (Potential Difference)

दो बिंदुओं के बीच एकक धनात्मक आवेश को ले जाने में किया गया कार्य, उन बिंदुओं के बीच का वैद्युत विभवांतर कहलाता है।

सूत्र:

VAB=VAVBV_{AB} = V_A - V_B

समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface)

वे पृष्ठ जिनके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाते हैं।

विशेषताएँ:

• समविभव पृष्ठ कभी एक-दूसरे को नहीं काटते।

• समविभव पृष्ठ के अनुदिश आवेश को ले जाने में कार्य शून्य होता है।

धारिता (Capacitance)

किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को उसकी धारिता कहते हैं।

सूत्र:

C=QVC = \frac{Q}{V}

SI मात्रक: फैरड (Farad)

समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor)

दो समानांतर धातु प्लेटों के बीच विद्युत ऊर्जा संचित करने वाले उपकरण को 

समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor)

दो समानांतर धातु प्लेटों के बीच विद्युत ऊर्जा संचित करने वाले उपकरण को समानांतर प्लेट संधारित्र कहते हैं।

धारिता का सूत्र:
C=ε0AdC = \frac{\varepsilon_0 A}{d}

जहाँ,
A = प्लेट का क्षेत्रफल
d = प्लेटों के बीच दूरी

यदि बीच में डाइलेक्ट्रिक माध्यम हो, तो: C=Kε0AdC = \frac{K\varepsilon_0 A}{d}

संधारित्र में संचित ऊर्जा

संधारित्र में संचित विद्युत ऊर्जा निम्न सूत्र से दी जाती है:

U=12CV2U = \frac{1}{2} CV^2

यह ऊर्जा विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित रहती है।

डाइलेक्ट्रिक (Dielectric)

डाइलेक्ट्रिक वे पदार्थ होते हैं जो विद्युत क्षेत्र में रखे जाने पर ध्रुवीकृत हो जाते हैं, जिससे संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है।

दैनिक जीवन में उपयोग

• कैमरा फ्लैश

• पंखे और टीवी के परिपथ

• मोबाइल चार्जर

• पावर सप्लाई यूनिट

सारांश

इस अध्याय में हमने वैद्युत विभव, विभवांतर, समविभव पृष्ठ, धारिता, संधारित्र तथा डाइलेक्ट्रिक के सिद्धांतों का अध्ययन किया। ये सभी अवधारणाएँ विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली को समझने में सहायक हैं। परीक्षा की दृष्टि से सूत्रों और उनके अनुप्रयोगों का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।

यह अध्याय विद्यार्थियों को आगे के अध्याय ‘स्थिरवैद्युत ऊर्जा’ और ‘धारा विद्युत’ को समझने का मजबूत आधार प्रदान करता है।

मैंने “स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (Class 12 Physics)” का पूरा full story एक अलग डॉक्यूमेंट (canvas) में तैयार कर दिया है।

इसमें भूमिका, सभी महत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, समानांतर प्लेट संधारित्र, डाइलेक्ट्रिक, संचित ऊर्जा, उपयोग और अंत में सारांश शामिल हैं—बोर्ड परीक्षा के हिसाब से बिल्कुल उपयुक्त।

अगर आप चाहें तो मैं इसी अध्याय के लिए आगे ये भी बना सकता हूँ:

  • प्रश्न–उत्तर (लघु / दीर्घ उत्तरीय)
  • MCQ / Objective प्रश्न (50 important)
  • एक शब्द / परिभाषा वाले प्रश्न
  • सरल भाषा में outro
  • Bihar Board / CBSE exam-oriented notes

बताइए, अगला क्या चाहिए?

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (Electrostatic Potential and Capacitance)

भूमिका

कक्षा 12 भौतिकी का यह अध्याय स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता विद्युतस्थैतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इस अध्याय में हम यह समझते हैं कि विद्युत आवेशों के कारण किसी बिंदु पर कितना कार्य करना पड़ता है, उसी को वैद्युत विभव कहते हैं। साथ ही, किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को धारिता कहा जाता है। यह अध्याय न केवल बोर्ड परीक्षा बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE, NEET) के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

वैद्युत विभव (Electrostatic Potential)

किसी विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य, उस बिंदु का वैद्युत विभव कहलाता है।

सूत्र:
V=WqV = \frac{W}{q}

जहाँ,
V = वैद्युत विभव
W = किया गया कार्य
q = परीक्षण आवेश

SI मात्रक: वोल्ट (Volt

बिंदु आवेश के कारण वैद्युत विभव

यदि किसी बिंदु आवेश Q से r दूरी पर स्थित बिंदु का वैद्युत विभव ज्ञात करना हो, तो:

V=14πε0QrV = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r}

यह विभव दूरी के साथ घटता जाता है और आवेश के चिन्ह पर निर्भर करता है।

वैद्युत विभवांतर (Potential Difference)

दो बिंदुओं के बीच एकक धनात्मक आवेश को ले जाने में किया गया कार्य, उन बिंदुओं के बीच का वैद्युत विभवांतर कहलाता है।

सूत्र:
VAB=VAVBV_{AB} = V_A - V_B

समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface)

वे पृष्ठ जिनके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाते हैं।

विशेषताएँ:

• समविभव पृष्ठ कभी एक-दूसरे को नहीं काटते।

• समविभव पृष्ठ के अनुदिश आवेश को ले जाने में कार्य शून्य होता है।

धारिता (Capacitance)

किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को उसकी धारिता कहते हैं।

सूत्र:

C=QVC = \frac{Q}{V}

SI मात्रक: फैरड (Farad)

SI मात्रक: फैरड (Farad)

समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor)

दो समानांतर धातु प्लेटों के बीच विद्युत ऊर्जा संचित करने वाले उपकरण को समानांतर प्लेट संधारित्र कहते हैं।

समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor)

दो समानांतर धातु प्लेटों के बीच विद्युत ऊर्जा संचित करने वाले उपकरण को समानांतर प्लेट संधारित्र कहते हैं।

धारिता का सूत्र:
C=ε0AdC = \frac{\varepsilon_0 A}{d}

जहाँ,
A = प्लेट का क्षेत्रफल
d = प्लेटों के बीच दूरी

यदि बीच में डाइलेक्ट्रिक माध्यम हो, तो:

संधारित्र में संचित ऊर्जा

संधारित्र में संचित विद्युत ऊर्जा निम्न सूत्र से दी जाती है:

U=12CV2U = \frac{1}{2} CV^2

यह ऊर्जा विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित रहती है।

डाइलेक्ट्रिक (Dielectric)

डाइलेक्ट्रिक वे पदार्थ होते हैं जो विद्युत क्षेत्र में रखे जाने पर ध्रुवीकृत हो जाते हैं, जिससे संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है।

दैनिक जीवन में उपयोग

• कैमरा फ्लैश

• पंखे और टीवी के परिपथ

• मोबाइल चार्जर

• पावर सप्लाई यूनिट

सारांश

इस अध्याय में हमने वैद्युत विभव, विभवांतर, समविभव पृष्ठ, धारिता, संधारित्र तथा डाइलेक्ट्रिक के सिद्धांतों का अध्ययन किया। ये सभी अवधारणाएँ विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली को समझने में सहायक हैं। परीक्षा की दृष्टि से सूत्रों और उनके अनुप्रयोगों का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।

महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न–उत्तर (Very Short / Short Answer)

प्रश्न 1. वैद्युत विभव की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: किसी विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य, उस बिंदु का वैद्युत विभव कहलाता है।

प्रश्न 2. वैद्युत विभव का SI मात्रक क्या है?

उत्तर: वोल्ट (Volt)

प्रश्न 3. धारिता क्या है?

उत्तर: किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को धारिता कहते हैं।

प्रश्न 4. समविभव पृष्ठ क्या होते हैं

उत्तर: वे पृष्ठ जिनके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाते हैं।

प्रश्न 5. फैरड किस भौतिक राशि की इकाई है?

उत्तर: धारिता की।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1. बिंदु आवेश के कारण वैद्युत विभव का सूत्र लिखिए।

उत्तर:

V = (1/4πϵ₀) · Q/r

प्रश्न 2. वैद्युत विभव और वैद्युत क्षेत्र में संबंध लिखिए।

उत्तर: वैद्युत क्षेत्र, वैद्युत विभव का ऋणात्मक प्रवणता (gradient) होता है।

प्रश्न 3. समानांतर प्लेट संधारित्र की धारिता किन कारकों पर निर्भर करती है?

उत्तर: प्लेटों का क्षेत्रफल, प्लेटों के बीच दूरी तथा माध्यम की परावैद्युत स्थिरांक पर।

प्रश्न 4. डाइलेक्ट्रिक माध्यम डालने से धारिता क्यों बढ़ जाती है?

उत्तर: डाइलेक्ट्रिक माध्यम विद्युत क्षेत्र को कम कर देता है, जिससे संधारित्र अधिक आवेश संचित कर पाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. समानांतर प्लेट संधारित्र का सिद्धांत समझाइए तथा धारिता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

उत्तर: समानांतर प्लेट संधारित्र दो समानांतर धातु प्लेटों से बना होता है जिनके बीच दूरी d होती है। जब प्लेटों पर आवेश दिया जाता है तो उनके बीच विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसकी धारिता C = ϵ₀A/d होती है। यदि बीच में डाइलेक्ट्रिक हो तो C = Kϵ₀A/d हो जाती है।

प्रश्न 2. संधारित्र में संचित ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

उत्तर: संधारित्र में संचित ऊर्जा U = 1/2 CV² होती है। यह ऊर्जा विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित रहती है।

सारांश

इस अध्याय में हमने वैद्युत विभव, विभवांतर, समविभव पृष्ठ, धारिता, संधारित्र तथा डाइलेक्ट्रिक माध्यम की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। यह अध्याय विद्युतस्थैतिकी की मूल अवधारणाओं को स्पष्ट करता है और आगे के अध्यायों को समझने के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। परीक्षा की दृष्टि से परिभाषाएँ, सूत्र और उनके अनुप्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

यह अध्याय विद्यार्थियों को आगे के अध्याय ‘स्थिरवैद्युत ऊर्जा’ और ‘धारा विद्युत’ को समझने का मजबूत आधार प्रदान करता है।

मैंने canvas में “स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (Class 12)” अध्याय के लिए

✔️ प्रश्न–उत्तर

✔️ लघु उत्तरीय प्रश्न

✔️ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

✔️ संपूर्ण सारांश

सब जोड़कर अपडेट कर दिया है।

अब यह नोट्स बोर्ड परीक्षा (CBSE/Bihar Board) के लिए सीधे पढ़ने और रिविजन के योग्य है।

अगर आप चाहें तो मैं आगे ये भी बना सकता हूँ:

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (Electrostatic Potential and Capacitance)

भूमिका

कक्षा 12 भौतिकी का यह अध्याय स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता विद्युतस्थैतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इस अध्याय में हम यह समझते हैं कि विद्युत आवेशों के कारण किसी बिंदु पर कितना कार्य करना पड़ता है, उसी को वैद्युत विभव कहते हैं। साथ ही, किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को धारिता कहा जाता है। यह अध्याय न केवल बोर्ड परीक्षा बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE, NEET) के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

वैद्युत विभव (Electrostatic Potential)

किसी विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य, उस बिंदु का वैद्युत विभव कहलाता है।

सूत्र:
V=WqV = \frac{W}{q}

जहाँ,
V = वैद्युत विभव
W = किया गया कार्य
q = परीक्षण आवेश

SI मात्रक: वोल्ट (Volt)


बिंदु आवेश के कारण वैद्युत विभव

यदि किसी बिंदु आवेश Q से r दूरी पर स्थित बिंदु का वैद्युत विभव ज्ञात करना हो, तो:

V=14πε0QrV = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q}{r}

यह विभव दूरी के साथ घटता जाता है और आवेश के चिन्ह पर निर्भर करता है।

वैद्युत विभवांतर (Potential Difference)

दो बिंदुओं के बीच एकक धनात्मक आवेश को ले जाने में किया गया कार्य, उन बिंदुओं के बीच का वैद्युत विभवांतर कहलाता है।

सूत्र:
VAB=VAVBV_{AB} = V_A - V_B

समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface)

वे पृष्ठ जिनके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाते हैं।

विशेषताएँ:

• समविभव पृष्ठ कभी एक-दूसरे को नहीं काटते।

• समविभव पृष्ठ के अनुदिश आवेश को ले जाने में कार्य शून्य होता है।

धारिता (Capacitance)

किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को उसकी धारिता कहते हैं।

सूत्र:
C=QVC = \frac{Q}{V}

SI मात्रक: फैरड (Farad)

समानांतर प्लेट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor)

दो समानांतर धातु प्लेटों के बीच विद्युत ऊर्जा संचित करने वाले उपकरण को समानांतर प्लेट संधारित्र कहते हैं।

धारिता का सूत्र:
C=ε0AdC = \frac{\varepsilon_0 A}{d}

जहाँ,
A = प्लेट का क्षेत्रफल
d = प्लेटों के बीच दूरी

यदि बीच में डाइलेक्ट्रिक माध्यम हो, तो: C=Kε0AdC = \frac{K\varepsilon_0 A}{d}

संधारित्र में संचित ऊर्जा

संधारित्र में संचित विद्युत ऊर्जा निम्न सूत्र से दी जाती है:

U=12CV2U = \frac{1}{2} CV^2

यह ऊर्जा विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित रहती है।

डाइलेक्ट्रिक (Dielectric)

डाइलेक्ट्रिक वे पदार्थ होते हैं जो विद्युत क्षेत्र में रखे जाने पर ध्रुवीकृत हो जाते हैं, जिससे संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है।

दैनिक जीवन में उपयोग

• कैमरा फ्लैश

• पंखे और टीवी के परिपथ

• मोबाइल चार्जर

• पावर सप्लाई यूनिट

सारांश

इस अध्याय में हमने वैद्युत विभव, विभवांतर, समविभव पृष्ठ, धारिता, संधारित्र तथा डाइलेक्ट्रिक के सिद्धांतों का अध्ययन किया। ये सभी अवधारणाएँ विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली को समझने में सहायक हैं। परीक्षा की दृष्टि से सूत्रों और उनके अनुप्रयोगों का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।

महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न–उत्तर (Very Short / Short Answer)

प्रश्न 1. वैद्युत विभव की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: किसी विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य, उस बिंदु का वैद्युत विभव कहलाता है।

प्रश्न 2. वैद्युत विभव का SI मात्रक क्या है?

उत्तर: वोल्ट (Volt)

प्रश्न 3. धारिता क्या है?

उत्तर: किसी चालक की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को धारिता कहते हैं।

प्रश्न 4. समविभव पृष्ठ क्या होते हैं?

उत्तर: वे पृष्ठ जिनके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाते हैं।

प्रश्न 5. फैरड किस भौतिक राशि की इकाई है?

उत्तर: धारिता की।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1. बिंदु आवेश के कारण वैद्युत विभव का सूत्र लिखिए।

उत्तर:

V = (1/4πϵ₀) · Q/r

प्रश्न 2. वैद्युत विभव और वैद्युत क्षेत्र में संबंध लिखिए।

उत्तर: वैद्युत क्षेत्र, वैद्युत विभव का ऋणात्मक प्रवणता (gradient) होता है।

प्रश्न 3. समानांतर प्लेट संधारित्र की धारिता किन कारकों पर निर्भर करती है

उत्तर: प्लेटों का क्षेत्रफल, प्लेटों के बीच दूरी तथा माध्यम की परावैद्युत स्थिरांक पर।

प्रश्न 4. डाइलेक्ट्रिक माध्यम डालने से धारिता क्यों बढ़ जाती है

उत्तर: डाइलेक्ट्रिक माध्यम विद्युत क्षेत्र को कम कर देता है, जिससे संधारित्र अधिक आवेश संचित कर पाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. समानांतर प्लेट संधारित्र का सिद्धांत समझाइए तथा धारिता का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

उत्तर: समानांतर प्लेट संधारित्र दो समानांतर धातु प्लेटों से बना होता है जिनके बीच दूरी d होती है। जब प्लेटों पर आवेश दिया जाता है तो उनके बीच विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसकी धारिता C = ϵ₀A/d होती है। यदि बीच में डाइलेक्ट्रिक हो तो C = Kϵ₀A/d हो जाती है।

प्रश्न 2. संधारित्र में संचित ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

उत्तर: संधारित्र में संचित ऊर्जा U = 1/2 CV² होती है। यह ऊर्जा विद्युत क्षेत्र के रूप में संचित रहती है।

सारांश

इस अध्याय में हमने वैद्युत विभव, विभवांतर, समविभव पृष्ठ, धारिता, संधारित्र तथा डाइलेक्ट्रिक माध्यम की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। यह अध्याय विद्युतस्थैतिकी की मूल अवधारणाओं को स्पष्ट करता है और आगे के अध्यायों को समझने के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। परीक्षा की दृष्टि से परिभाषाएँ, सूत्र और उनके अनुप्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. वैद्युत विभव का SI मात्रक है—

(A) जूल

(B) कूलाम

(C) वोल्ट

(D) फैरड

उत्तर: (C) वोल्ट

प्रश्न 2. धारिता का सूत्र है—

(A) C = V/Q

(B) C = Q/V

(C) C = Q×V

(D) C = V²/Q

उत्तर: (B) C = Q/V

प्रश्न 3. समानांतर प्लेट संधारित्र की धारिता निर्भर नहीं करती—

(A) प्लेट के क्षेत्रफल पर

(B) प्लेटों के बीच दूरी पर

(C) प्लेटों के पदार्थ पर

(D) माध्यम पर

उत्तर: (C) प्लेटों के पदार्थ पर

प्रश्न 4. समविभव पृष्ठ पर आवेश को ले जाने में किया गया कार्य होता है—

(A) अधिकतम

(B) न्यूनतम

(C) शून्य

(D) अनंत

उत्तर: (C) शून्य

प्रश्न 5. डाइलेक्ट्रिक डालने से संधारित्र की धारिता—

(A) घटती है

(B) शून्य हो जाती है

(C) अपरिवर्तित रहती है

(D) बढ़ती है

उत्तर: (D) बढ़ती है

एक शब्द / परिभाषा वाले प्रश्न

प्रश्न 1. एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य कहलाता है—

उत्तर: वैद्युत विभव

प्रश्न 2. आवेश संचित करने की क्षमता कहलाती है—

उत्तर: धारिता

प्रश्न 3. धारिता की SI इकाई क्या है?

उत्तर: फैरड

प्रश्न 4. समान विभव वाले पृष्ठ क्या कहलाते हैं?

उत्तर: समविभव पृष्ठ

प्रश्न 5. संधारित्र में ऊर्जा किस रूप में संचित रहती है?

उत्तर: विद्युत क्षेत्र ऊर्जा

महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. वैद्युत विभव और वैद्युत विभवांतर में अंतर लिखिए।

उत्तर: किसी एक बिंदु पर वैद्युत विभव होता है, जबकि दो बिंदुओं के बीच वैद्युत विभवांतर होता है।

प्रश्न 2. संधारित्र क्या है?

उत्तर: वह यंत्र जो विद्युत आवेश को संचित करता है, संधारित्र कहलाता है।

प्रश्न 3. डाइलेक्ट्रिक क्या होता है?

उत्तर: वे पदार्थ जो विद्युत क्षेत्र में रखने पर ध्रुवीकृत हो जाते हैं, डाइलेक्ट्रिक कहलाते हैं।

यह अध्याय विद्यार्थियों को आगे के अध्याय ‘स्थिरवैद्युत ऊर्जा’ और ‘धारा विद्युत’ को समझने का मजबूत आधार प्रदान करता है।

मैंने आपके अध्याय “स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता (Class 12 Physics)” में अब ये सभी भाग जोड़ दिए हैं 👇

✔️ बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

✔️ एक शब्द / परिभाषा वाले प्रश्न

✔️ महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

अब यह चैप्टर पूरा exam-ready नोट्स बन गया है, जो

Bihar Board / CBSE

Board Exam + Revision

दोनों के लिए उपयोगी है।

अगर आप चाहें तो मैं आगे ये भी तैयार कर सकता हूँ:

🔹 50 Objective MCQ (exam pattern)

🔹 Numerical problems with solution

🔹 Very Short / 1–2 mark questions

🔹 पूरा chapter का आसान भाषा में OUTRO

बस बताइए, अगला क्या चाहिए?

50 objective impotant question50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective / MCQ)

1. वैद्युत विभव की SI इकाई है—

(A) जूल

(B) वोल्ट

(C) फैरड

(D) कूलाम

उत्तर: (B)

2. वैद्युत विभव एक—

(A) सदिश राशि

(B) अदिश राशि

(C) सदिश क्षेत्र

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B)

3. धारिता का सूत्र है—

(A) C = V/Q

(B) C = Q/V

(C) C = Q×V

(D) C = V²/Q

उत्तर: (B)

4. धारिता की SI इकाई है—

(A) ओम

(B) वोल्ट

(C) फैरड

(D) एम्पियर

उत्तर: (C)

5. फैरड बराबर होता है—

(A) कूलाम/वोल्ट

(B) वोल्ट/कूलाम

(C) जूल/कूलाम

(D) एम्पियर/वोल्ट

उत्तर: (A)

6. बिंदु आवेश के कारण वैद्युत विभव निर्भर करता है—

(A) दूरी पर

(B) आवेश पर

(C) दोनों पर

(D) किसी पर नहीं

उत्तर: (C)

7. वैद्युत विभव का विमीय सूत्र है—

(A) ML²T⁻³A⁻¹

(B) ML²T⁻³A⁻²

(C) ML²T⁻²A⁻¹

(D) ML²T⁻¹A⁻²

उत्तर: (A)

8. समविभव पृष्ठ पर किया गया कार्य होता है—

(A) अधिकतम

(B) न्यूनतम

(C) शून्य

(D) अनंत

उत्तर: (C)

9. समविभव पृष्ठ—

(A) एक-दूसरे को काटते हैं

(B) कभी नहीं काटते

(C) समानांतर होते हैं

(D) केवल गोल होते हैं

उत्तर: (B)

10. वैद्युत विभव शून्य माना जाता है—

(A) पृथ्वी पर

(B) चालक पर

(C) अनंत पर

(D) प्लेट पर

उत्तर: (C)

11. समानांतर प्लेट संधारित्र की धारिता निर्भर नहीं करती—

(A) प्लेट के क्षेत्रफल पर

(B) प्लेटों की दूरी पर

(C) माध्यम पर

(D) प्लेट के पदार्थ पर

उत्तर: (D)

12. समानांतर प्लेट संधारित्र की धारिता C ∝ —

(A) d

(B) 1/d

(C) d²

(D) 1/d²

उत्तर: (B)

13. डाइलेक्ट्रिक माध्यम डालने से धारिता—

(A) घटती है

(B) बढ़ती है

(C) शून्य हो जाती है

(D) समान रहती है

उत्तर: (B)

14. डाइलेक्ट्रिक स्थिरांक को दर्शाया जाता है—

(A) μ

(B) ρ

(C) K

(D) σ

उत्तर: (C)

15. संधारित्र में ऊर्जा संचित होती है—

(A) चालक में

(B) प्लेट में

(C) चुंबकीय क्षेत्र में

(D) विद्युत क्षेत्र में

उत्तर: (D)

16. संधारित्र में संचित ऊर्जा का सूत्र है—

(A) U = CV

(B) U = QV

(C) U = 1/2 CV²

(D) U = Q²V

उत्तर: (C)

17. वैद्युत क्षेत्र और वैद्युत विभव का संबंध है—

(A) E = dV/dr

(B) E = –dV/dr

(C) E = V/Q

(D) E = Q/V

उत्तर: (B)

18. वैद्युत विभवांतर की इकाई है—

(A) जूल

(B) फैरड

(C) वोल्ट

(D) ओम

उत्तर: (C)

19. संधारित्र का उपयोग किया जाता है—

(A) धारा बढ़ाने में

(B) आवेश संचित करने में

(C) प्रतिरोध बढ़ाने में

(D) विभव घटाने में

उत्तर: (B)

20. डाइलेक्ट्रिक का मुख्य प्रभाव है—

(A) धारा बढ़ाना

(B) विद्युत क्षेत्र कम करना

(C) विभव बढ़ाना

(D) आवेश हटाना

उत्तर: (B)

21. वैद्युत विभव का मान ऋणात्मक होता है जब—

(A) आवेश धनात्मक हो

(B) आवेश ऋणात्मक हो

(C) दूरी शून्य हो

(D) क्षेत्र शून्य हो

उत्तर: (B)

22. दो समविभव पृष्ठों के बीच विद्युत क्षेत्र—

(A) शून्य

(B) समान

(C) अधिकतम

(D) परिवर्ती

उत्तर: (B)

23. एक फैरड धारिता का अर्थ है—

(A) 1 C पर 1 J ऊर्जा

(B) 1 C पर 1 V विभव

(C) 1 V पर 1 C आवेश

(D) 1 J पर 1 C आवेश

उत्तर: (C)

24. वैद्युत विभव का ऋणात्मक प्रवणता दर्शाती है—

(A) आवेश

(B) धारिता

(C) वैद्युत क्षेत्र

(D) ऊर्जा

उत्तर: (C)

25. समविभव पृष्ठ के अनुदिश गति करने पर—

(A) कार्य अधिकतम

(B) कार्य न्यूनतम

(C) कार्य शून्य

(D) कार्य अनंत

उत्तर: (C)

26. समानांतर प्लेट संधारित्र में प्लेटें होती हैं—

(A) असमान

(B) समानांतर

(C) लंबवत

(D) गोल

उत्तर: (B)

27. यदि प्लेटों के बीच दूरी बढ़ाई जाए तो धारिता—

(A) बढ़ेगी

(B) घटेगी

(C) समान रहेगी

(D) शून्य होगी

उत्तर: (B)

28. वैद्युत विभव ऊर्जा प्रति इकाई—

(A) धारा

(B) आवेश

(C) समय

(D) दूरी

उत्तर: (B)

29. संधारित्र का व्यावहारिक उदाहरण है—

(A) फ्यूज

(B) रेसिस्टर

(C) कैमरा फ्लैश

(D) ट्रांसफार्मर

उत्तर: (C)

30. डाइलेक्ट्रिक माध्यम रखने से प्लेटों के बीच—

(A) क्षेत्र बढ़ता है

(B) क्षेत्र घटता है

(C) क्षेत्र शून्य हो जाता है

(D) कोई परिवर्तन नहीं

उत्तर: (B)

31. वैद्युत विभव का ग्राफ दूरी के साथ—

(A) स्थिर रहता है

(B) बढ़ता है

(C) घटता है

(D) शून्य होता है

उत्तर: (C)

32. वैद्युत क्षेत्र रेखाएँ समविभव पृष्ठों पर—

(A) स्पर्शी होती हैं

(B) समानांतर होती हैं

(C) लंबवत होती हैं

(D) गोल होती हैं

उत्तर: (C)

33. समानांतर प्लेट संधारित्र में प्रयुक्त माध्यम—

(A) केवल वायु

(B) केवल निर्वात

(C) केवल ठोस

(D) कोई भी डाइलेक्ट्रिक

उत्तर: (D)

34. वैद्युत विभवांतर मापा जाता है—

(A) एमीटर से

(B) गैल्वेनोमीटर से

(C) वोल्टमीटर से

(D) ओह्ममीटर से

उत्तर: (C)

35. संधारित्र की धारिता बढ़ाने का एक तरीका है—

(A) दूरी बढ़ाना

(B) क्षेत्रफल घटाना

(C) डाइलेक्ट्रिक डालना

(D) आवेश घटाना

उत्तर: (C)

36. वैद्युत विभव का मान निर्भर नहीं करता—

(A) आवेश पर

(B) दूरी पर

(C) परीक्षण आवेश पर

(D) माध्यम पर

उत्तर: (C)

37. वैद्युत विभव ऊर्जा का SI मात्रक है—

(A) जूल

(B) वोल्ट

(C) फैरड

(D) ओम

उत्तर: (A)

38. संधारित्र में आवेश संचित होता है—

(A) केवल एक प्लेट पर

(B) दोनों प्लेटों पर

(C) माध्यम में

(D) परिपथ में

उत्तर: (B)

39. वैद्युत विभव का मान अधिक होगा जब—

(A) दूरी अधिक हो

(B) आवेश अधिक हो

(C) क्षेत्र शून्य हो

(D) माध्यम हो

उत्तर: (B)

40. संधारित्र का संकेत परिपथ में दर्शाया जाता है—

(A) दो समानांतर रेखाओं से

(B) एक वृत्त से

(C) त्रिभुज से

(D) आयत से

उत्तर: (A)

41. वैद्युत विभव की परिभाषा में प्रयुक्त आवेश होता है—

(A) वास्तविक

(B) ऋणात्मक

(C) परीक्षण

(D) प्रेरित

उत्तर: (C)

42. समविभव पृष्ठों के बीच दूरी बढ़ने पर क्षेत्र—

(A) बढ़ता है

(B) घटता है

(C) शून्य होता है

(D) अपरिवर्तित

उत्तर: (B)

43. संधारित्र में अधिकतम ऊर्जा तब होगी जब—

(A) V अधिक हो

(B) C अधिक हो

(C) दोनों अधिक हों

(D) दोनों कम हों

उत्तर: (C)

44. वैद्युत विभव का ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है—

(A) दिशा

(B) मात्रा

(C) आवेश का प्रकार

(D) ऊर्जा

उत्तर: (C)

45. वैद्युत विभव की परिभाषा में अनंत को लिया जाता है क्योंकि—

(A) क्षेत्र अधिक होता है

(B) विभव शून्य माना जाता है

(C) दूरी कम होती है

(D) आवेश शून्य होता है

उत्तर: (B)

46. संधारित्र का आविष्कार किया गया था—

(A) लेडेन जार के रूप में

(B) बैटरी के रूप में

(C) फ्यूज के रूप में

(D) रेसिस्टर के रूप में

उत्तर: (A)

47. डाइलेक्ट्रिक पदार्थ सामान्यतः होते हैं—

(A) चालक

(B) कुचालक

(C) अर्धचालक

(D) सुपरचालक

उत्तर: (B)

48. वैद्युत विभव की गणना में प्रयुक्त स्थिरांक है—

(A) μ₀

(B) g

(C) ε₀

(D) h

उत्तर: (C)

49. वैद्युत विभव का मान ऋणात्मक होगा यदि—

(A) आवेश धनात्मक हो

(B) आवेश ऋणात्मक हो

(C) दूरी शून्य हो

(D) माध्यम हो

उत्तर: (B)

50. यह अध्याय संबंधित है—

(A) धारा विद्युत से

(B) चुंबकत्व से

(C) स्थिरवैद्युतिकी से

(D) प्रकाश से

उत्तर: (C)

निष्कर्ष 

इस प्रकार स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता अध्याय में हमने वैद्युत विभव, विभवांतर, समविभव पृष्ठ, धारिता, संधारित्र, डाइलेक्ट्रिक तथा संधारित्र में संचित ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों का विस्तार से अध्ययन किया। यह अध्याय न केवल परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि आधुनिक विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली को समझने में भी सहायक है। यदि विद्यार्थी इस अध्याय की परिभाषाओं, सूत्रों और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का नियमित अभ्यास करें, तो बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना आसान हो जाता है। यह अध्याय आगे आने वाले अध्यायों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है और भौतिकी की गहरी समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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